Wednesday, February 24, 2010

गरज गरज जब बादल आये

ही आणखी एक कविता....पिल्लाच्या Homework साठी लिहिलेली.

तपती धरती खिल खिल जाए
गरज गरज जब बादल आए

आस लिये वो एक बूंद की
कडक धूप मे जलती रहती
काले बादल जब घिर आए
धरती मन ही मन मुसकाए

बूंदे आयी, खुशिया लायी
बिजली के शर संग है लायी
हर तपनकी वो आग बुझाए
गरज गरज जब जल बरसाए

जयश्री

No comments: