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Sunday, February 25, 2024

कुर्बान हम पे कुदरत हुई है

हमको किसीसे उल्फत हुई है
धरती बदलके जन्नत हुई है

उनकी जरासी बस हां हुई है
देखो दिवानी हालत हुई है 

दिल में खुशी की दस्तक हुई है
कुर्बान हम पे कुदरत हुई है

गुस्ताख आंखे कुछ कह गयी है
पहली दफा ये जुर्रत हुई है

थोडी शराफत, थोडी शरारत
ऐसी हमारी नीयत हुई है

मांगे खुदासे अब और क्या हम
पूरी हमारी हसरत हुई है

जयश्री अंबासकर

Sunday, November 19, 2023

दे दो इजाजत

न बादल, न बिजली, न सावन की आहट
किताबों के पन्नों में बस सरसराहट 

कहां गुम हसीं और वो खिलखिलाहट 
क्यूं है उदासी में सहमा सा घूंघट 

पलकों में  कितनी गुमसुम शरारत
आंखों की बोली कहां है वो नटखट 

दुनिया जहां की छोडो शराफत 
अब तो जरा सी कर दो बगावत 

बदल दो जमाने से डरने की आदत 
करो अब तो दिल से दिल की हिफाजत 

गर है जरा सी खुद से मोहब्बत 
दिल को खुशी की दे दो इजाजत 

जयश्री कुलकर्णी अंबासकर

Wednesday, July 19, 2023

आजाद रातें

सुनते सुनाते बतियाती रातें
हौले से होती मदहोश रातें

हां चांद भी तो बाहों में था तब
होती थी कितनी धनवान रातें

दिन भी खुशी से, थे जल्द ढलते
तुम्हारे लिये थी बेचैन रातें

होती कहां थी आजाद रातें
लेती थी लेकिन इल्जाम रातें

जीये जा रहा था तुम्हें गुनगुनाते
हुई जा रही थी कुर्बान रातें

गुमसुम हुई कब वो प्यारी सी बातें
लगने लगी अब ये अनजान रातें

लगती थी हमदर्द खामोश रातें
अब क्यूं हुई है बेदर्द रातें

✍️जयश्री अंबासकर 

Monday, July 19, 2021

जी हमें मंजूर है

ख्वाब में उनका सताना जी हमें मंजूर है
निंद आंखोंसे गंवाना भी हमें मंजूर है

महफिले उनकी गजब होगी हमे मालूम है
सिर्फ उनका गुनगुनाना भी हमें मंजूर है

मुस्कुराके रोक लेना कातिलाना है बडा
इस तरह उनका मनाना ही हमें मंजूर है

बात अब हर एक उनकी मान लेते प्यार से
महज उनका हक जताना भी हमें मंजूर है

देर से आना पुरानी आदतों में एक है
झूठ उनका हर बहाना भी हमें मंजूर है

साथ उनका शायराना पल लगे हर खुशनुमा
वक्त का खामोश गाना भी हमे मंजूर है

जयश्री अंबासकर

ये गझल मेरी आवाज में सुन सकते है !!




Tuesday, June 29, 2021

ख्वाब तो आजाद है

तुम अगर यूं साथ हो तो जिंदगी आबाद है
बिन तुम्हारे सच कहूं तो जिंदगी बरबाद है

आसमां के चांद तू, खुद पे ना अब गुमान कर
इस जमीं पर तुझसे बेहतर देख मेरा चांद है

क्यूं हकीकत और ख्वाबों में खडी दीवार है
जिंदगी से बस हमारी इतनी सी फ़रियाद है

आशिकी में होश खो के जिंदगी मदहोश है
अब जहन में सिर्फ़ तुम हो और तुम्हारी याद है

जिंदगी है बेरहम और कायदे भी सख्त है  
खुश हूं मै की अब भी मेरे ख्वाब तो आजाद है

इश्क ही अब जिंदगी और  आशिकी हर सांस है
अब खुदाई और खुदा भी सब तुम्हारे बाद है   

जयश्री अंबासकर

ये गझल मेरी आवाज में नीचे दी गयी लिंक पर सुन सकते है



Friday, June 25, 2021

यकीन कर

जब जब जीवन लगे पहेली
सुलझाने की कोशिश कर
कही ना कही हर सवाल का
होगा उत्तर यकीन कर

राते लंबी कितनी भी हो
देख ख्वाब, ना आहे भर
सुबह खडी उस पार रातके
सूरज पे तू यकीन कर

कडी धूपके बाद हमेशा
सावन का इंतजार कर
काले बादल घिर आये तो
होगी बारिश यकीन कर

कठिन घडी आयी है लेकिन
दौर चलेगा ये पलभर
समय ठहरता नही कभी भी
चलने पर तू यकीन कर

हार कभी तो, कभी जीत है
खुद के दम पे कोशिश कर
मुमकिन है जीतना हारके
इतना खुद पे यकीन कर

जयश्री अंबासकर

ये कविता आप नीचे दी गयी लिंक पर सुन सकते है



Wednesday, June 23, 2021

दायरा

 साथ लाया था वो सेहरा और खिंचा दायरा
अब तो जीवन भर है पहरा और खिंचा दायरा

ख्वाब आंखो में हजारो, जिंदगी की आस है
ख्वाब टूटे, सब है बिखरा और खिंचा दायरा

दौडना तो दूर है, चलना भी मुश्किल है यहां
बेडियोंके के साथ कोहरा और खिंचा दायरा

बंद कमरा और आंसू, इतनी सीमित जिंदगी
अब तो है गुमनाम चेहरा और खिंचा दायरा

इस फलक पर नाम अपना देखने की चाह है
दिल है घायल, वक्त ठहरा और खिंचा दायरा

कितने दिन ऐसे जियेंगे, बस अभी सारे जुलम
है अटल संघर्ष गहरा और खिंचा दायरा

एक दिन आएगा ऐसा, कुछ करेंगे खुद ही हम
तोड देंगे हर वो पहरा और खिंचा दायरा

जयश्री अंबासकर

ही कविता माझ्या आवाजात खाली दिलेल्या लिंकवर ऐकता येईल



Thursday, June 17, 2021

सन्नाटा

चुस्त लम्हें जिंदगीके खो गये जाने किधर
सुस्त सी खामोशियों में सिर्फ यादोंके भंवर

चंद
बादल आसमां मे फिर भी था ऐसा असर
रोशनी सूरज की मेरे खो गयी जाने किधर

दूर तक कोई किनारा, अब भी ना आता नजर
डूबती कश्ती में कैसे, खत्म होगा ये सफर

सुबह की ना ताजगी है, रात को ना हमसफर
अब तो हिस्से में पडी है सिर्फ सूनी दोपहर

शोरगुल भी था कभी पर, अब तो जीवन  खंडहर
बस है सन्नाटों में लिपटे, सर्द से शामो सहर

जयश्री अंबासकर

You can listen this गझल on the link below



Monday, June 14, 2021

हमराज

 मौजूद था पर आसमां में, चांद कुछ नाराज था
बेशक मेरे मेहबूब के ही, नूर का आगाज था      

क्या करू तारीफ उनकी, हर अदा थी शायरी
शायरीमें कातिलाना, क्या गजब अंदाज था

जन्नत से उतरी हूर सी थी, क्या  करू लफ़्जोबयां 
नर्गिसी मासूम चेहरा, हुस्न का सरताज था  

उनकी वो संजीदगी में, नर्म सा संगीत था
खिलखिलाना भी तो उनका, जैसे कोई साज था

शाम की तनहाइयों में दर्द का एहसास था
दर्द ना उनका कभी हमदर्द का मोहताज था

देखी है आंखों में उनकी, दर्द की परछाइयाँ  
जख्म क्या था, दर्द क्या था, ये छुपा इक राज था

चंद यादे छोडकर, चुपचाप वो रुखसत हुए
राज सीने में दफन और बस खुदा हमराज था

जयश्री अंबासकर

ये शायरी आप मेरी आवाज में नीचे दी हुई लिंक पर सुन सकते है



Sunday, June 06, 2021

लंबा सफर है साहिल न कोई

तनहा ये राहे, मंजिल न कोई
लंबा सफर है  साहिल न कोई ॥

यादों में धुंदले, कुछ पल है तेरे
कुछ बिखरे बिखरे, कुछ है सवारे
न आहट है तेरी, न दस्तक है कोई
लंबा सफर है  साहिल न कोई ॥

ख्वाबों में हलचल, कभी थी बहारे
कटी उम्र सारी उसी के सहारे
लेकर उमंगे, आया न कोई
लंबा सफर है  साहिल न कोई ॥

परवाह ना थी, किसीको हमारी
आंखों में थी सिर्फ अश्कोंकी बारी
उम्मीद अब ना, हसरत न कोई
लंबा सफर है  साहिल न कोई ॥

गुमनाम गलियां, गुमनाम मेले
चलते रहे हम, अकेले अकेले
अब तो है आदत शिकायत न कोई
लंबा सफर है  साहिल न कोई ॥

जयश्री अंबासकर

You can listen this Poem in My Voice on the link below



Friday, May 28, 2021

fall/पल

 3.1 K views... !!

Yuhuuuuu..... 💃😀
It gives immense pleasure when people appreciate your work... isn't it Nikhil Iyer 😃
You make my words Musical.
You pour Music into my words ... !!
Thank u so so much 😀👍❤



Tuesday, April 27, 2021

जी हमें मंजूर है

जी हमें मंजूर है

ख्वाब में उनका सताना जी हमें मंजूर है
निंद आंखोंसे गंवाना भी हमें मंजूर है 

महफिले उनकी गजब होगी हमे मालूम है
सिर्फ उनका गुनगुनाना भी हमें मंजूर है

मुस्कुराके रोक लेना कातिलाना है बडा
इस तरह उनका मनाना जी हमें मंजूर है

बात अब हर एक उनकी मान लेते प्यार से  
महज उनका हक जताना भी हमें मंजूर है

देर से आना पुरानी आदतों में एक है 
झूठ उनका हर बहाना भी हमें मंजूर है

साथ उनका शायराना पल लगे हर खुशनुमा
वक्त का खामोश चलना भी हमे मंजूर है

जयश्री अंबासकर

Thursday, April 15, 2021

गुमनाम सफर

गुमनाम था सारा सफर
परवाह ना कोई फिकर
मंजूर था ये फैसला
न होगा कभी उसका जिकर

मौजूदगी थी उम्रभर
वो थी खडी हर राह पर
रंजिश न थी कोई कभी
के था वजूद, जैसे सिफर

एक दिन आया कहर
थी एक सूनी दोपहर
घरपर हुआ हमला मगर
घरबार था कुछ बेखबर

वहशी ही थे वो जानवर
संकट तो था भारी मगर
खूंख्वार बनकर शेरनी
वो सामने आयी नजर

तुफान का रुख मोडकर
इज्जत लगायी दांवपर
बरबाद होने से बचाया
जानपर यूं खेलकर

भूचाल सी थी, वो खबर  
के हिल गया सारा शहर
बात निकली बात से
होने लगा उसका जिकर

परदा किया था उम्रभर
बदलाव था ऐसा मगर
मिलने लगा सम्मान, आदर
अब उसे शामो सहर

जयश्री अंबासकर

Click the link below to listen the Poem



Friday, April 09, 2021

बडी मुद्दत के बाद

खुद से ही मिलने हूं आई, बडी मुद्दत के बाद
खुद ने हिम्मत है जुटाई, बडी मुद्दत के बाद

खुद से खुद को मिलने की, जरूरत थी आज
खुद को फुरसत है मिल पाई, बडी मुद्दत के बाद

जाने क्या नाराजगी थी खुदकोखुद के साथ
हुई आज ही मूंहदिखाई, बडी मुद्दत के बाद

नजरे खुद से जब मिलाई खुद ने, शरारत से
नजरे खुद से है शरमाई, बडी मुद्दत के बाद

खुद को पाया है आज, बडी शिद्दत के बाद
ऐसी जन्नत है मिल पाई, बडी मुद्दत के बाद

खुद से मुलाकात हुई, बडी शराफत के साथ
खुद से खुद इज्जत है पाई, बडी मुद्दत के बाद

खुद ने रख्खा था खुद को, बडी हिफाजत के साथ
ये खुद ने समझी है खुदाई, बडी मुद्दत के बाद

बातों का कारवां चलता रहा, इबादत के साथ
बाते जज्बाती होती गई, बडी मुद्दत के बाद

खुद से मिलने से पहले, खुद की दहशत सी थी
खुद से ही मुहोब्बत हुई, बडी मुद्दत के बाद

जयश्री अंबासकर

You can listen this on the link given below



Monday, April 05, 2021

फिदा...

माझं आणखी एक नवीन हिंदी रोमॅंटिक गाणं !!

Singer, Composer - Nikhil Iyer

Lyrics - Jayashree Ambaskar



 

Friday, March 26, 2021

समझा करो...

 


दिल तो पागल है यारो समझा करो
थोडा घायल है यारो समझा करो

जश्न है जिंदगी कभी, कभी चुप है
इश्क दाखिल है यारो समझा करो

दिल ने समझा के प्यार है उनको
दिल तो जाहिल है यारो समझा करो

ख्वाबों में अब तो खनक होने लगी
उनकी पायल है यारो समझा करो

उनकी नजरोंके तीर दिल पे चले
इश्क कातिल है यारो समझा करो

इश्क में हम भी तो बरबाद हुए
वरना काबिल है यारो समझा करो

जिंदगी कितनी खूबसूरत है
वो भी शामिल है यारो समझा करो

जयश्री अंबासकर