Sunday, February 25, 2024
कुर्बान हम पे कुदरत हुई है
Sunday, November 19, 2023
दे दो इजाजत
Wednesday, July 19, 2023
आजाद रातें
हौले से होती मदहोश रातें
हां चांद भी तो बाहों में था तब
होती थी कितनी धनवान रातें
दिन भी खुशी से, थे जल्द ढलते
तुम्हारे लिये थी बेचैन रातें
होती कहां थी आजाद रातें
लेती थी लेकिन इल्जाम रातें
जीये जा रहा था तुम्हें गुनगुनाते
हुई जा रही थी कुर्बान रातें
गुमसुम हुई कब वो प्यारी सी बातें
लगने लगी अब ये अनजान रातें
लगती थी हमदर्द खामोश रातें
अब क्यूं हुई है बेदर्द रातें
✍️जयश्री अंबासकर
Monday, July 19, 2021
जी हमें मंजूर है
ख्वाब में उनका सताना जी हमें मंजूर है
निंद आंखोंसे गंवाना भी हमें मंजूर है
महफिले उनकी गजब होगी हमे मालूम है
सिर्फ उनका गुनगुनाना भी हमें मंजूर है
मुस्कुराके रोक लेना कातिलाना है बडा
इस तरह उनका मनाना ही हमें मंजूर है
बात अब हर एक उनकी मान लेते प्यार से
महज उनका हक जताना भी हमें मंजूर है
देर से आना पुरानी आदतों में एक है
झूठ उनका हर बहाना भी हमें मंजूर है
साथ उनका शायराना पल लगे हर खुशनुमा
वक्त का खामोश गाना भी हमे मंजूर है
जयश्री अंबासकर
ये गझल मेरी आवाज में सुन सकते है !!
Tuesday, June 29, 2021
ख्वाब तो आजाद है
तुम अगर यूं साथ हो तो जिंदगी आबाद है
बिन तुम्हारे सच कहूं तो जिंदगी बरबाद है
आसमां के चांद तू, खुद पे ना अब गुमान कर
इस जमीं पर तुझसे बेहतर देख मेरा चांद है
क्यूं हकीकत और ख्वाबों में खडी दीवार है
जिंदगी से बस हमारी इतनी सी फ़रियाद है
आशिकी में होश खो के जिंदगी मदहोश है
अब जहन में सिर्फ़ तुम हो और तुम्हारी याद है
जिंदगी है बेरहम और कायदे भी सख्त है
खुश हूं मै की अब भी मेरे ख्वाब तो आजाद है
इश्क ही अब जिंदगी और
आशिकी हर सांस है
अब खुदाई और खुदा भी सब तुम्हारे बाद है
जयश्री अंबासकर
ये गझल मेरी आवाज में नीचे दी गयी लिंक पर सुन सकते है
Friday, June 25, 2021
यकीन कर
जब जब जीवन लगे पहेली
सुलझाने की कोशिश कर
कही ना कही हर सवाल का
होगा उत्तर यकीन कर
राते लंबी कितनी भी हो
देख ख्वाब, ना आहे भर
सुबह खडी उस पार रातके
सूरज पे तू यकीन कर
कडी धूपके बाद हमेशा
सावन का इंतजार कर
काले बादल घिर
आये तो
होगी बारिश यकीन कर
कठिन घडी आयी है लेकिन
दौर चलेगा ये पलभर
समय ठहरता नही कभी भी
चलने पर तू यकीन कर
हार कभी तो, कभी जीत है
खुद के दम पे कोशिश कर
मुमकिन है जीतना हारके
इतना खुद पे यकीन कर
जयश्री अंबासकर
ये कविता आप नीचे दी गयी लिंक पर सुन सकते है
Wednesday, June 23, 2021
दायरा
साथ लाया था वो सेहरा और खिंचा दायरा
अब तो जीवन भर है पहरा और खिंचा दायरा
ख्वाब आंखो में हजारो, जिंदगी की आस है
ख्वाब टूटे, सब है बिखरा और खिंचा
दायरा
दौडना तो दूर है, चलना भी मुश्किल है यहां
बेडियोंके के साथ कोहरा और खिंचा दायरा
बंद कमरा और आंसू, इतनी सीमित जिंदगी
अब तो है गुमनाम चेहरा और खिंचा दायरा
इस फलक पर नाम अपना देखने की चाह है
दिल है घायल, वक्त ठहरा और खिंचा दायरा
कितने दिन ऐसे जियेंगे, बस अभी सारे जुलम
है अटल संघर्ष गहरा और खिंचा दायरा
एक दिन आएगा ऐसा, कुछ करेंगे खुद ही हम
तोड देंगे हर वो पहरा और खिंचा दायरा
जयश्री अंबासकर
ही कविता माझ्या आवाजात खाली दिलेल्या लिंकवर ऐकता येईल
Thursday, June 17, 2021
सन्नाटा
चुस्त लम्हें जिंदगीके खो गये जाने किधर
सुस्त सी खामोशियों में सिर्फ यादोंके भंवर
चंद बादल आसमां मे फिर भी था ऐसा असर
रोशनी सूरज की मेरे खो गयी जाने किधर
दूर तक कोई किनारा,
अब
भी ना आता नजर
डूबती कश्ती में कैसे, खत्म होगा ये सफर
सुबह की ना ताजगी है, रात को ना हमसफर
अब तो हिस्से में पडी है सिर्फ सूनी दोपहर
शोरगुल भी था कभी पर, अब तो जीवन
खंडहर
बस है सन्नाटों में लिपटे, सर्द से शामो सहर
जयश्री अंबासकर
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Monday, June 14, 2021
हमराज
मौजूद था पर आसमां में, चांद कुछ नाराज था
बेशक मेरे मेहबूब के ही, नूर का आगाज था
क्या करू तारीफ उनकी,
हर अदा थी शायरी
शायरीमें कातिलाना,
क्या
गजब अंदाज था
जन्नत से उतरी हूर सी थी, क्या करू लफ़्जोबयां
नर्गिसी मासूम चेहरा, हुस्न का सरताज था
उनकी वो संजीदगी में, नर्म सा संगीत था
खिलखिलाना भी तो उनका, जैसे कोई साज था
शाम की तनहाइयों में दर्द का एहसास था
दर्द ना उनका कभी हमदर्द का मोहताज था
देखी है आंखों में उनकी, दर्द की परछाइयाँ
जख्म क्या था, दर्द क्या था, ये छुपा इक राज था
चंद यादे छोडकर, चुपचाप वो रुखसत हुए
राज सीने में दफन और बस खुदा हमराज था
जयश्री अंबासकर
ये शायरी आप मेरी आवाज में नीचे दी हुई लिंक पर सुन सकते है
Sunday, June 06, 2021
लंबा सफर है साहिल न कोई
तनहा ये राहे, मंजिल
न कोई
लंबा सफर है साहिल
न कोई ॥
यादों में धुंदले, कुछ
पल है तेरे
कुछ बिखरे बिखरे, कुछ
है सवारे
न आहट है तेरी, न
दस्तक है कोई
लंबा सफर है साहिल
न कोई ॥
ख्वाबों में हलचल, कभी
थी बहारे
कटी उम्र सारी उसी के सहारे
लेकर उमंगे, आया
न कोई
लंबा सफर है साहिल
न कोई ॥
परवाह ना थी, किसीको
हमारी
आंखों में थी सिर्फ अश्कोंकी बारी
उम्मीद अब ना, हसरत
न कोई
लंबा सफर है साहिल
न कोई ॥
गुमनाम गलियां, गुमनाम
मेले
चलते रहे हम, अकेले
अकेले
अब तो है आदत शिकायत न कोई
लंबा सफर है साहिल
न कोई ॥
जयश्री अंबासकर
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Friday, May 28, 2021
fall/पल
3.1 K views... !!
Tuesday, April 27, 2021
जी हमें मंजूर है
Thursday, April 15, 2021
गुमनाम सफर
जयश्री अंबासकर
Click the link below to listen the Poem
Friday, April 09, 2021
बडी मुद्दत के बाद
जयश्री अंबासकर
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Monday, April 05, 2021
फिदा...
माझं आणखी एक नवीन हिंदी रोमॅंटिक गाणं !!
Singer, Composer - Nikhil Iyer
Lyrics - Jayashree Ambaskar
Friday, March 26, 2021
समझा करो...
दिल तो पागल है यारो समझा करो
थोडा घायल है यारो समझा करो
जश्न है जिंदगी कभी, कभी चुप है
इश्क दाखिल है यारो समझा करो
दिल ने समझा के प्यार है उनको
दिल तो जाहिल है यारो समझा करो
ख्वाबों में अब तो खनक होने लगी
उनकी पायल है यारो समझा करो
उनकी नजरोंके तीर दिल पे चले
इश्क कातिल है यारो समझा करो
इश्क में हम भी तो बरबाद हुए
वरना काबिल है यारो समझा करो
जिंदगी कितनी खूबसूरत है
वो भी शामिल है यारो समझा करो
जयश्री अंबासकर