Showing posts with label Jayashree Ambaskar. Show all posts
Showing posts with label Jayashree Ambaskar. Show all posts

Friday, June 25, 2021

यकीन कर

जब जब जीवन लगे पहेली
सुलझाने की कोशिश कर
कही ना कही हर सवाल का
होगा उत्तर यकीन कर

राते लंबी कितनी भी हो
देख ख्वाब, ना आहे भर
सुबह खडी उस पार रातके
सूरज पे तू यकीन कर

कडी धूपके बाद हमेशा
सावन का इंतजार कर
काले बादल घिर आये तो
होगी बारिश यकीन कर

कठिन घडी आयी है लेकिन
दौर चलेगा ये पलभर
समय ठहरता नही कभी भी
चलने पर तू यकीन कर

हार कभी तो, कभी जीत है
खुद के दम पे कोशिश कर
मुमकिन है जीतना हारके
इतना खुद पे यकीन कर

जयश्री अंबासकर

ये कविता आप नीचे दी गयी लिंक पर सुन सकते है



Monday, June 14, 2021

हमराज

 मौजूद था पर आसमां में, चांद कुछ नाराज था
बेशक मेरे मेहबूब के ही, नूर का आगाज था      

क्या करू तारीफ उनकी, हर अदा थी शायरी
शायरीमें कातिलाना, क्या गजब अंदाज था

जन्नत से उतरी हूर सी थी, क्या  करू लफ़्जोबयां 
नर्गिसी मासूम चेहरा, हुस्न का सरताज था  

उनकी वो संजीदगी में, नर्म सा संगीत था
खिलखिलाना भी तो उनका, जैसे कोई साज था

शाम की तनहाइयों में दर्द का एहसास था
दर्द ना उनका कभी हमदर्द का मोहताज था

देखी है आंखों में उनकी, दर्द की परछाइयाँ  
जख्म क्या था, दर्द क्या था, ये छुपा इक राज था

चंद यादे छोडकर, चुपचाप वो रुखसत हुए
राज सीने में दफन और बस खुदा हमराज था

जयश्री अंबासकर

ये शायरी आप मेरी आवाज में नीचे दी हुई लिंक पर सुन सकते है



Saturday, June 12, 2021

वृत्त - अनलज्वाला

वृत्त - अनलज्वाला
मात्रा ८ ८ ८

वणवण फिरुनी, धावुनि दमतो संध्याकाळी
दिवस उसासे टाकत असतो संध्याकाळी

थकून वारा निपचित असतो संध्याकाळी
कधी विरक्ती घेउन फिरतो संध्याकाळी

दिवसभराची दिनकर करतो वेठबिगारी
दमून सुटका मागत असतो संध्याकाळी

निशेस येण्या अवधी असतो अजुन जरा अन्
दिवसच हातुन निसटत असतो संध्याकाळी

विचार भलता येतो कायम कातरवेळी
मनास विळखा घालुन बसतो संध्याकाळी

चुकाच केल्या आजवरी का वाटत असते
उगाच शिक्षा भोगत बसतो संध्याकाळी

भरकटलेले गलबत माझे सावरतो मी
नवा किनारा शोधत फिरतो संध्याकाळी

नव्या दमाने खेळत असतो रोज सकाळी
पुन्हा तसाच पराजित असतो संध्याकाळी

चराचराच्या नश्वरतेचा जागर होतो
तनमन सारे व्याकुळ करतो संध्याकाळी

प्रसन्न करतो देवघरातुन सांजदिवा मग
मनास उजळत तेवत असतो संध्याकाळी

जयश्री अंबासकर

तुम्हाला ही गझल माझ्या आवाजात खाली दिलेल्या लिंकवर ऐकता येईल.



Friday, May 28, 2021

fall/पल

 3.1 K views... !!

Yuhuuuuu..... 💃😀
It gives immense pleasure when people appreciate your work... isn't it Nikhil Iyer 😃
You make my words Musical.
You pour Music into my words ... !!
Thank u so so much 😀👍❤



Thursday, April 15, 2021

गुमनाम सफर

गुमनाम था सारा सफर
परवाह ना कोई फिकर
मंजूर था ये फैसला
न होगा कभी उसका जिकर

मौजूदगी थी उम्रभर
वो थी खडी हर राह पर
रंजिश न थी कोई कभी
के था वजूद, जैसे सिफर

एक दिन आया कहर
थी एक सूनी दोपहर
घरपर हुआ हमला मगर
घरबार था कुछ बेखबर

वहशी ही थे वो जानवर
संकट तो था भारी मगर
खूंख्वार बनकर शेरनी
वो सामने आयी नजर

तुफान का रुख मोडकर
इज्जत लगायी दांवपर
बरबाद होने से बचाया
जानपर यूं खेलकर

भूचाल सी थी, वो खबर  
के हिल गया सारा शहर
बात निकली बात से
होने लगा उसका जिकर

परदा किया था उम्रभर
बदलाव था ऐसा मगर
मिलने लगा सम्मान, आदर
अब उसे शामो सहर

जयश्री अंबासकर

Click the link below to listen the Poem



Friday, March 26, 2021

समझा करो...

 


दिल तो पागल है यारो समझा करो
थोडा घायल है यारो समझा करो

जश्न है जिंदगी कभी, कभी चुप है
इश्क दाखिल है यारो समझा करो

दिल ने समझा के प्यार है उनको
दिल तो जाहिल है यारो समझा करो

ख्वाबों में अब तो खनक होने लगी
उनकी पायल है यारो समझा करो

उनकी नजरोंके तीर दिल पे चले
इश्क कातिल है यारो समझा करो

इश्क में हम भी तो बरबाद हुए
वरना काबिल है यारो समझा करो

जिंदगी कितनी खूबसूरत है
वो भी शामिल है यारो समझा करो

जयश्री अंबासकर

Wednesday, March 10, 2021

वृत्त - मंजुघोषा

आसवांचा कोणता व्यवहार झाला अन सुखाचा केवढा भडिमार झाला बोलली ती हसुन थोडी मोकळी अन जग म्हणाले “काय हा व्यभिचार झाला”

नववधूचे खूप त्याने हाल केले होय त्याचा तो अता अधिकार झाला श्रेष्ठ कुठला देव ह्याचा वाद होता त्याच मुद्द्यावरति हिंसाचार झाला एकदा त्याने भितीने साथ केली अन गुन्ह्याचा खुद्द भागीदार झाला

✍️जयश्री अंबासकर
११ मार्च २०२१

सुख शोधताना

Sunday, February 28, 2021

Friday, December 25, 2020

कहां हो तुम

Another Project with Talented Singer, Composer Nikhil Iyer !!

My Poetry with Background Score by Nikhil Iyer !!

If you like it ...Please Share n Subscribe!!