Tuesday, August 17, 2021

रातें

सपने सलोने बुनती है राते चंदा को अपने चुनती है राते सांसोंकी धुन और खामोश बातें धडकन की लय पे चलती है रातें

उमंगे हजारो सैलाब दिल में तिनके की तरहा बहती है रातें होती है जब भी फुलोंसी बातें असर से सहर तक महकती है रातें सांसों में बजती तरन्नुम नयी सी अंजान राहों पे चलती है रातें बेखौफ़ दिल की लाखों मुरादें सपनों में पूरी करती है रातें तनहाईयों से गुजरती है जब भी हमदर्द बनके छलकती है रातें जयश्री अंबासकर



Tuesday, August 10, 2021

मोह


जगण्याने बेजार अन् विझलो होतो पार
तुझ्यामुळे फुलण्याचा पुन्हा मोह एकवार

#माझी_फोटोगिरी 
#सुबहकेनजारे

Sunday, August 08, 2021

वृत्त - अर्कशेषा

वृत्त - अर्कशेषा
गालगाल गालगाल गालगाल गागा

चांदण्यात एकटीच आज मी सख्या रे
पार रात्र मी कशी करू तुझ्याविना रे
आठवातले अजून चिंब भास सारे
उष्ण पेटते अजून अंतरी निखारे

आग चांदण्यात तीच, तेच गार वारे
तू हवास या क्षणी नको मुळी पहारे
द्वाड चांदण्यातले चटोर धुंद तारे
पेटवून रोमरोम आणती शहारे

चांदणे टिपूर छेड काढते अता रे
चंद्रही अता फितूर ऐकुनी इशारे
देहधून वाजते अधीर गात्र सारे
रात्र ही भरात ये अता तरी सख्या रे

जयश्री अंबासकर

ही कविता तुम्ही माझ्या आवाजात इथे ऐकू शकता.




Monday, August 02, 2021

वृत्त - देवराज

देवराज वृत्त
गालगाल गालगाल गालगाल गालगा

भेटुनी सख्या तुला युगे कितीक लोटली
सांग तू कशी घडेल थेट भेट आपुली
दूर राहिलो तरी कधी न प्रीत आटली
ओढ मात्र आणखीच वाढली उरातली 

भोगले तुझ्याविनाच तप्त कोरडे ऋतू
आपसूक गोठले मनातले किती ऋतू
मूक जाहले ऋतू कधी न हासले ऋतू
फक्त क्रूर भासले तुझ्याविना सख्या ऋतू 

साद घातली किती मनास मी पुन्हा पुन्हा
हाक थेट पोचली तुझ्याकडेच रे पुन्हा
गुंतणे तुझ्यात मी असेल हा जरी गुन्हा
सांगते करेन मी असा गुन्हा पुन्हा पुन्हा 

दूर राहुनी सख्या किती असे झुरायचे
शुष्क होउनी कशास सांग तू जगायचे
स्वप्न पाहते मनात एकरूप व्हायचे
एकदा तुझ्या मिठीत धुंद मोहरायचे 

जयश्री अंबासकर



Monday, July 26, 2021

मेघ आज बरसले

धुंद होउनी पुन्हा 
मेघ आज बरसले 
पान पान मोहरून
अंतरी सुखावले 

मेघनाद ऐकुनी 
देहभान विसरले
झेलुनी प्रपात थेट
मन्मनी शहारले 

नभातुनी कुणी जणू
सुगंध कुंभ ओतले 
दरवळून आसमंत
चित्तही खुळावले

तरूवरी किती नवे
साज सुबक चढवले 
जलमुकूट तरुशिरी
लखलखीत मढवले 

सरी सरीत प्रेमरंग
गोड गोड मिसळले 
अधीरशा धरेवरी 
देह भरुन गोंदले 

रिक्त होउनी नभी
मेघ सर्व पांगले
तृप्त तृप्त अंबरी
सप्तरंग उमलले 

जयश्री अंबासकर

Thursday, July 22, 2021

वृत्त - मदिरा

वृत्त - मदिरा
लगावली - गालल गालल गाललगा ललगा ललगा ललगा ललगा

अल्लड मोहक डौल तिचा, हरिणीसम नाजुक चंचलता 
हास्य खट्याळ खळीत तिचे, मधुकुंभ तिथे जणु होय रिता
सावळ सावळ रंग तिचा, तन सुंदर रेखिव शिल्प जणू
स्निग्ध तिच्या नजरेत नवे, खुलते फुलते नित इंद्रधनू

सिंहकटी लयबद्ध हले, घन रेशिम कुंतल सावरता
नित्य खुळे जन होत किती, दिलखेच अदा बघता बघता 
लोभस शैशव का अजुनी, सरले न तिचे जपलेच कसे
लाघव वावर गोड तिचा, बघताच जिवा हर लावि पिसे    

रूपवती गुणवान अशी, असतेच कुठे अवनीवरती
स्वप्न असे पण का न बघू, धरबंध कशास मनावरती
स्वप्न परी गवसेल कधी, कळले न कुणा न कळेल कधी
तोवर स्वप्न खुळे बघतो, जगता जगता गवसेल कधी 

जयश्री अंबासकर 

ही कविता तुम्हाला माझ्या आवाजात इथे ऐकता येईल



Monday, July 19, 2021

जी हमें मंजूर है

ख्वाब में उनका सताना जी हमें मंजूर है
निंद आंखोंसे गंवाना भी हमें मंजूर है

महफिले उनकी गजब होगी हमे मालूम है
सिर्फ उनका गुनगुनाना भी हमें मंजूर है

मुस्कुराके रोक लेना कातिलाना है बडा
इस तरह उनका मनाना ही हमें मंजूर है

बात अब हर एक उनकी मान लेते प्यार से
महज उनका हक जताना भी हमें मंजूर है

देर से आना पुरानी आदतों में एक है
झूठ उनका हर बहाना भी हमें मंजूर है

साथ उनका शायराना पल लगे हर खुशनुमा
वक्त का खामोश गाना भी हमे मंजूर है

जयश्री अंबासकर

ये गझल मेरी आवाज में सुन सकते है !!




Tuesday, July 06, 2021

तुम्हारे शहर में

खुशियों के रस्ते तुम्हारे शहर में
मौसम है हसते तुम्हारे शहर में 

तनहाइयों को नही है ठिकाना 
पल है मचलते तुम्हारे शहर में 

मोहब्बत तो होगी हमे भी यकीनन
दिल के फरिश्ते तुम्हारे शहर में

खुशबू तुम्हारी हर इक गली में 
महकते है रस्ते तुम्हारे शहर में  

हमारा शहर भी, शहर तो है लेकिन 
किस्से है बनते तुम्हारे शहर में

चाहे किधर भी रुख हो हमारा
कदम फिर भी मुडते तुम्हारे शहर में 

शादी भले हो हमारे शहर में
रस्मोंकी किश्ते तुम्हारे शहर में 

रफ्तार पकडे दुनिया के रस्ते 
खुशी से टहलते तुम्हारे शहर में 

जयश्री अंबासकर

Tuesday, June 29, 2021

ख्वाब तो आजाद है

तुम अगर यूं साथ हो तो जिंदगी आबाद है
बिन तुम्हारे सच कहूं तो जिंदगी बरबाद है

आसमां के चांद तू, खुद पे ना अब गुमान कर
इस जमीं पर तुझसे बेहतर देख मेरा चांद है

क्यूं हकीकत और ख्वाबों में खडी दीवार है
जिंदगी से बस हमारी इतनी सी फ़रियाद है

आशिकी में होश खो के जिंदगी मदहोश है
अब जहन में सिर्फ़ तुम हो और तुम्हारी याद है

जिंदगी है बेरहम और कायदे भी सख्त है  
खुश हूं मै की अब भी मेरे ख्वाब तो आजाद है

इश्क ही अब जिंदगी और  आशिकी हर सांस है
अब खुदाई और खुदा भी सब तुम्हारे बाद है   

जयश्री अंबासकर

ये गझल मेरी आवाज में नीचे दी गयी लिंक पर सुन सकते है